कभी प्रेम कभी डर कभी घृणा का झमेल है
क्या करें भाई सब चकरों का खेल है
सब सूक्ष्म शरीर की हरकतों का मेल है
क्या करें भाई जीवन चक्रों का खेल है
मूलाधार का सरल स्वभाव है,
शरीर और भूमि से जुड़ाव है
मगर सहस्रार का उल्टा विचार है
जाग्रत तो आकाश में विस्तार है
सुषुम्ना में प्राणों के बहाव की बनी बेल है
क्या करें भाई, जीवन चक्रों का खेल है
स्वाधिष्ठान में भावनाओं का प्रवाह है
अंदर उठती लहरें उसकी गवाह है
कभी अमृत कभी मोह का जेल है
क्या करें भाई सब चक्रों का खेल है
मणिपुर की अग्नि देती है साहस
वही अग्नि क्रोध का तेल है
क्या करें भाई सब चक्रों का खेल है
अनाहत में प्रेम तो कभी विरह का असर है
विशुद्धि में सत्य तो कभी शब्दों का कहर है
आज्ञा में माया और चेतना का मेल है
क्या करें भाई सब चक्रों का खेल है
ये सब देवी का रचा हुआ शक्ति का खेल है
क्या करें भाई जीवन चक्रों का खेल है
वैभव माथुर