समझता शायद तू अपना है,
दिख भी जाता कभी कभी है,
पर शायद कुछ तो कमी है,
ना जाने क्यों कुछ छुपा से रहे हो तुम,
नादान मैं ही शायद हूँ,
की आँखें मीझता जा रहा हूँ,
और तुम हो जो बस अपना दिखाते जा रहे हो……
समझता शायद तू अपना है,
दिख भी जाता कभी कभी है,
पर शायद कुछ तो कमी है,
ना जाने क्यों कुछ छुपा से रहे हो तुम,
नादान मैं ही शायद हूँ,
की आँखें मीझता जा रहा हूँ,
और तुम हो जो बस अपना दिखाते जा रहे हो……