अरमान 

गुलाबों से मुहब्बत है जिन्हें उनको खबर कर दो,,,

चुभने वाले कांटे भी बहुत अरमान रखते हैं…!!

खुद तकलीफ का स्वाद चखे बिना किसी को दूसरे की विपत्ति का अहसास नहीं होता है ।

एक बादशाह अपने कुत्ते के साथ नाव में यात्रा कर रहा था । उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था । 

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कुत्ते ने कभी नौका में सफर नहीं किया था, इसलिए वह अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था । 
वह उछल-कूद कर रहा था और किसी को चैन से नहीं बैठने दे रहा था ।

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मल्लाह उसकी उछल-कूद से परेशान था कि ऐसी स्थिति में यात्रियों की हड़बड़ाहट से नाव डूब जाएगी । 
वह भी डूबेगा और दूसरों को भी ले डूबेगा ।
 परन्तु कुत्ता अपने स्वभाव के कारण उछल-कूद में लगा था ।
 ऐसी स्थिति देखकर बादशाह भी गुस्से में था ।
 पर, कुत्ते को सुधारने का कोई उपाय उन्हें समझ में नहीं आ रहा था ।

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नाव में बैठे दार्शनिक से रहा नहीं गया ।
 वह बादशाह के पास गया और बोला – “सरकार ! अगर आप इजाजत दें तो मैं इस कुत्ते को भीगी बिल्ली बना सकता हूँ ।”
 बादशाह ने तत्काल अनुमति दे दी । 
दार्शनिक ने दो यात्रियों का सहारा लिया और उस कुत्ते को नाव से उठाकर नदी में फेंक दिया ।
 कुत्ता तैरता हुआ नाव के खूंटे को पकड़ने लगा ।
 उसको अब अपनी जान के लाले पड़ रहे थे । 
कुछ देर बाद दार्शनिक ने उसे खींचकर नाव में चढ़ा लिया ।

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वह कुत्ता चुपके से जाकर एक कोने में बैठ गया ।
 नाव के यात्रियों के साथ बादशाह को भी उस कुत्ते के बदले व्यवहार पर बड़ा आश्चर्य हुआ ।
 बादशाह ने दार्शनिक से पूछा – “यह पहले तो उछल-कूद और हरकतें कर रहा था, अब देखो कैसे यह पालतू बकरी की तरह बैठा है ?”

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दार्शनिक बोला –

खुद तकलीफ का स्वाद चखे बिना किसी को दूसरे की विपत्ति का अहसास नहीं होता है ।
 इस कुत्ते को जब मैंने पानी में फेंक दिया तो इसे पानी की ताकत और नाव की उपयोगिता समझ में आ गयी ।”

🇮🇳  
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કોઈ લૌટા દે મેરે બીતે હુએ દીન

કોઇ લૌટા દે મેરે બીતે હુએ દિન બીતે હુએ દિન વોહ મેરે પ્યારે પલ છીન મેરે ખ્વાબો કે મહલ, મેરે સપનો કે નગર પી લીએ જીનકે લીએ મૈંને જીવન કા ઝહર આજ મૈં ઢુંઢું કહા ખો ગયે જાને કિધર બીતે હુએ દિન વોહ મેરે પ્યારે પલ છીન મૈં અકેલા તો ન થા થે મેરે સાથ કંઇ એક આંધી સી ઊઠી જો ભી થા લે કે ગઇ ઐસે ભી દિન થે કભી મેરી દુનિયા થી મેરી બીતે હુએ દિન વોહ મેરે પ્યારે પલ છીન – 

मोदी शिवराज हैं

“मोदी शिवराज हैं” कविता को मैने दिनांक 06 अप्रैल 2014 को लिखा था | इस कविता के माध्यम से मैने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की लोकप्रियता के साथ भारतीयों का उनमें कितना विश्वास है को चित्रित क…

स्रोत: मोदी शिवराज हैं

अल्फाज़ 

ना समेटो चन्द अल्फाजों में हमें …

खुल गये तो कई क़िस्सों में बिखर.जाएँगे…
जला के देख लो गर यक़ीन नही …
जल के कुछ और.. निखर आएँगे ..
ना बदलो हमें, बदलना हमारी फ़ितरत नही 
जो बदले तो.., बहुत कुछ बदल जाएँगे …
हटा दो अब उसूलों की बंदिशें हमसे …
जो लगेगी ठोकर तो खुद ही संभल जाएँगे .

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