मैं दिल्ली लौट आया हूँ

कविताएं लिखता था जिस पते से,
वहीं फिर लौट आया हूँ,
है आती मुहब्बत की खुशबू जिस बाग में,
वहीं आज फिर से आया हूँ,
शाम ढलते ही फूलों से,
जहाँ अलग आती है ‘खुशबू’ रोज,
उसे अपने हर ‘आज’ में भरने,
मैं दिल्ली लौट आया हूँ..

भले क़िस्सों को जीना, ख़्वाबों में होना,
हर पल में मुस्कुराना, मैं भूल आया हूँ।
पर गर पढोगे कभी, फ़ुर्सत में मुझे,
कुछ पन्ने पीछे ही सही, मैं सब छोड़ आया हूँ।
ये क़िस्मत है मेरी, या साज़िश तुम्हारी,
जो नए हुनर की तलाश में तुम तक,
मैं दिल्ली लौट आया हूँ..
©सन्नी कुमार ‘अद्विक’

मैथ बाज़ार

चलो आज हिसाब करते है,
खेल खेल में आज व्यापार करते है,
सन्नी सर कहते है कि आइडिया बड़ा और शुरुआत छोटा होना चाहिए,
सो आज हम भी एक कोशिश कामयाब करते है,
चलो आज मैथ बाज़ार में व्यापार करते है।

हो सबको आज ख़बर की यहाँ,
अब और गणित मुझे नहीं सताता है,
किताबों से निकल कर बाहर,
अब खेल के मैदान में भी संग वह आता है,
एवरेज, रनरेट और इकॉनमी यह गणित मुझे सिखाता है।

नहीं हूँ आज इस बाजार अकेला,
हर ओर यहाँ है जो गणित है छाया,
क्रय-विक्रय-फन-फैक्ट्स के बूथ,
हर ओर बस गणित है छाया,
जो जटिल अबूझ पहेली था अबतक,
उसको हमारे गुरुओं ने है सरल बनाया।

आओ सब मिल आज हिसाब करते है,
जीत हार, लाभ हानि को जान,
आज गणित के व्यवहारिक गुर सीखते है,
कितना सुंदर हुआ है माहौल,
चलो आज गणित संग मस्ती करते है।😜

©सन्नी कुमार अद्विक

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