पाकिस्तान जाएंगे ईरानी विदेश मंत्री, शांतिवार्ता की उम्मीद
प्रकाशित २४ अप्रैल २०२६आखिरी अपडेट २४ अप्रैल २०२६
आपके लिए अहम जानकारी
73 विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस सौंपा
ईयू के नए प्रतिबंधों पर रूस की चेतावनी, कहा कड़ा जवाब देंगे
आम आदमी पार्टी में टूट, राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने का दावा
गाजा युद्ध में अब तक 38,000 से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों की मौत: संयुक्त राष्ट्र
यूक्रेन के खिलाफ लड़ने वाले रूसी सैनिकों के लिए यूरोप के दरवाजे बंद करने का प्रस्ताव
रिश्वत मामले में गिरफ्तार रिलायंस और डीजीसीए अधिकारियों की हिरासत बढ़ी
भारत की एक अदालत ने रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किए गए रिलायंस और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के दो अधिकारियों की हिरासत 6 मई तक बढ़ा दी है. सीबीआई का आरोप है कि इन दोनों अधिकारियों ने एस्टेरिया एयरोस्पेस के ड्रोन आयात से संबंधित तीन आवेदनों को मंजूरी देने के लिए करीब 15 लाख रुपये की रिश्वत के लेन-देन की योजना बनाई थी.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, डीजीसीए के डिप्टी डायरेक्टर जनरल मुदावाथ देवुला और रिलायंस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट भरत माथुर को गिरफ्तार किया गया है. सीबीआई के मुताबिक, डीजीसीए अधिकारी पर आरोप हैं कि उन्होंने डीजीसीए के पास लंबित आवेदनों को मंजूरी देने के लिए अनुचित लाभ की मांग की.
रिलायंस ने कहा है कि माथुर सिर्फ एक सलाहकार के तौर पर काम कर रहे थे और कंपनी को किसी अवैध लेन-देन की जानकारी नहीं है और न ही ऐसे किसी लेन-देन की मंजूरी दी गई. एस्टेरिया एयरोस्पेस एक ड्रोन कंपनी है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी जियो प्लेटफॉर्म की है, जो अरबपति मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का हिस्सा है.
पाकिस्तान जाने की तैयारी में ईरानी विदेश मंत्री, शांतिवार्ता शुरू होने की उम्मीद
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची शुक्रवार को पाकिस्तान के लिए रवाना होने वाले हैं, जहां अमेरिका और के बीच युद्धविराम वार्ता को दोबारा शुरू कराने की कोशिशें चल रही हैं. ईरान की सरकारी एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, यह दौरा “द्विपक्षीय बातचीत” और बिगड़ते क्षेत्रीय हालातों पर केंद्रित रहेगा. अरागची इसके बाद ओमान और रूस भी जा सकते हैं. इस दौरे को खास अमेरिका से बातचीत करने पर केंद्रित न करके ईरान का अपने लिए समर्थन जुटाने के रूप में भी देखा जा रहा है.
पाकिस्तान इस बीच दोनों देशों को बातचीत की मेज पर वापस लाने की कोशिश कर रहा है. इस हफ्ते वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन वह हो नहीं हो पाई. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जोंस एक्ट में छूट को 90 दिनों के लिए बढ़ाया है, ताकि विदेशी जहाजों के जरिए तेल और गैस की सप्लाई आसान हो सके. हालांकि, इसके बावजूद क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ है. होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है, अब भी टकराव का केंद्र बना हुआ है. इस वजह से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है और मध्य पूर्व में हजारों लोगों की जान जा चुकी है.
73 विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस सौंपा
राज्यसभा के 73 विपक्षी सांसदों ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए एक नोटिस सौंपा है. राष्ट्रपति को संबोधित करता हुआ यह नोटिस राज्यसभा के महासचिव को सौंपा गया है. कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी दी है.
उन्होंने लिखा, "अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नौ विशिष्ट आरोप हैं, जिन्हें बेहद विस्तार से दर्ज किया गया है और जिन्हें न तो नकारा जा सकता है और न ही दबाया जा सकता है. उनका पद पर बने रहना संविधान पर एक हमला है. यह पूरी तरह शर्मनाक है कि वह व्यक्ति अब भी पद पर बना हुआ है, ताकि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारों पर काम कर सके."
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, राज्यसभा सचिवालय अब इस नोटिस की जांच करेगा और यह प्रक्रिया स्थापित संसदीय प्रक्रियाओं के अनुसार आगे बढ़ेगी. यदि इसे स्वीकार कर लिया जाता है, तो इस प्रस्ताव की वजह से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आचरण की औपचारिक जांच शुरू हो सकती है.
गाजा युद्ध में अब तक 38,000 से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों की मौत: संयुक्त राष्ट्र
युद्ध का असर सबसे ज्यादा महिलाओं और लड़कियों पर पड़ रहा है और गाजा इसका एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है. यूएन वुमन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच गाजा में 38,000 से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों की मौत हुई. यह आंकड़ा गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा पर आधारित है, जिसे बाद में कम रिपोर्टिंग को ध्यान में रखते हुए संशोधित किया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि “महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मिलकर कुल मौतों का आधे से ज्यादा हिस्सा हैं” और असल संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई शव अब भी मलबे में दबे हैं.
रिपोर्ट यह भी बताती है कि जब-जब बड़े पैमाने पर नागरिक ढांचे जैसे घर, स्कूल और शरण स्थल तबाह हुए, तब महिलाओं और बच्चों की मौतों में भी उछाल आया. करीब 11,000 महिलाएं और लड़कियां स्थायी विकलांगता का शिकार हुई हैं. संघर्ष विराम के बावजूद हालात अब भी गंभीर हैं, जहां सीमित मदद ही पहुंच पा रही है और खाने-पीने की चीजों के साथ-साथ महिलाओं के लिए जरूरी स्वच्छता उत्पादों की भी कमी बनी हुई है.
हिंसा के अलावा, युद्ध का एक छिपा असर भी है, महिलाओं के लिए जरूरी स्वास्थ्य और प्रजनन सेवाओं का टूट जाना. यूएन की अधिकारी सोफिया काल्टॉर्प ने कहा, “हम ऐसे संघर्षों में तेजी देख रहे हैं, जैसा 1990 के दशक के बाद नहीं देखा गया और इसका असर खास तौर पर महिलाओं और लड़कियों पर पड़ रहा है.” अस्पतालों और मैटरनिटी वार्डों के नष्ट होने से हालात और बिगड़े हैं, जिससे महिलाओं की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं.
ईयू के नए प्रतिबंधों पर रूस की चेतावनी, कहा कड़ा जवाब देंगे
रूस ने यूरोपीय संघ के नए तेल और गैस प्रतिबंधों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि इससे न सिर्फ ईयू बल्कि विकासशील देशों को भी नुकसान होगा. रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया पहले से ही ऊर्जा संकट और संसाधनों की कमी से जूझ रही है. उनके मुताबिक, “ब्रसेल्स ऊर्जा बाजार को और अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है, जिससे खुद उसे और विकासशील देशों को नुकसान होगा, जो पहले ही महंगी ऊर्जा का बोझ झेल रहे हैं.”
यूरोपीय संघ ने गुरुवार को रूस के खिलाफ 20वां प्रतिबंध पैकेज लागू किया, जिसमें रूसी तेल और गैस के परिवहन पर और सख्ती, साथ ही तेल उत्पादकों और रिफाइनरियों पर नए प्रतिबंध शामिल हैं. जखारोवा ने यह भी कहा कि इन प्रतिबंधों का असर खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है, क्योंकि इसमें उर्वरकों पर भी पाबंदियां शामिल हैं.
रूस ने साफ संकेत दिया है कि वह इन कदमों का जवाब देगा. जखारोवा ने कहा, “हम जवाबी कार्रवाई करेंगे. ये कदम सख्त होंगे और हमारे हितों के मुताबिक तैयार किए जाएंगे.”
चीन और रूस के रक्षा मंत्रियों ने आपसी रिश्ते और मजबूत करने पर दिया जोर
चीन के रक्षा मंत्री डॉन्ग जुन ने शुक्रवार को रूस यात्रा के दौरान अपने रूसी समकक्ष से मुलाकात की. चीनी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों ने रणनीतिक संवाद को और मजबूत करने और “सभी क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को गहरा करने” पर सहमति जताई. बातचीत में इस बात पर भी जोर दिया गया कि दोनों देश मिलकर “विश्व न्याय और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने” के लिए काम करेंगे और अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देंगे.
इस मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों के बीच सैन्य और द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय हालात पर भी विस्तार से चर्चा हुई. बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने “आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श” किया.
चीन के रक्षा मंत्री डॉन्ग जुन 23 से 28 अप्रैल तक रूस और किर्गिस्तान के दौरे पर हैं. इस दौरान वे किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है.
यूक्रेन के खिलाफ लड़ने वाले रूसी सैनिकों के लिए यूरोप के दरवाजे बंद करने का प्रस्ताव
यूरोपीय संघ में रूस के उन सैनिकों की एंट्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिन्होंने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लिया है. एस्टोनिया के विदेश मंत्री मारगुस साखना ने ब्रसेल्स में हुई ईयू बैठक के दौरान कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद कई रूसी सैनिक यूरोप आना चाह सकते हैं. उन्होंने कहा कि आम जनता को यह समझा पाना मुश्किल होगा. उन्होंने आगे जोड़ा, “वे बहुत खतरनाक लोग हैं.” एक दस्तावेज के मुताबिक, 2022 से अब तक करीब 15 लाख रूसी नागरिक इस युद्ध में शामिल रहे हैं, जिनमें से लगभग 6.4 लाख अभी भी सक्रिय हैं.
प्रस्ताव में कहा गया है कि इन सैनिकों के पास लड़ाई का अनुभव है और हिंसा का इस्तेमाल उनकी सामान्य प्रवृत्ति बन सकता है. इससे यूरोप में न सिर्फ हिंसक अपराध बढ़ने का खतरा है, बल्कि संगठित अपराध, चरमपंथी समूहों और दुश्मन देशों की गतिविधियों के लिए भी रास्ता खुल सकता है. दस्तावेज यह भी बताता है कि रूस में पहले से ही पूर्व सैनिकों के लौटने के बाद गंभीर अपराधों में बढ़ोतरी देखी गई है, और 2025 की पहली छमाही में अपराध 15 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए.
इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईयू और शेंगेन देश ऐसे सभी रूसी नागरिकों को वीजा और रेजिडेंस परमिट देने से इनकार करें, जो इस युद्ध में शामिल रहे हैं. हालांकि, कुछ राजनयिकों का कहना है कि इसे लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग देशों के वीजा नियम अलग हैं और यह साबित करना भी चुनौतीपूर्ण होगा कि कौन सैनिक युद्ध में शामिल था. इसके बावजूद एस्टोनिया का कहना है कि अगर इच्छा हो, तो सब कुछ मुमकिन है.
केजरीवाल बोले, “बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का”
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी पर पंजाब की जनता के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का.” उनका यह बयान राघव चड्ढा की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने छह अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में जाने की बात कही है.
राघव चड्ढा के मुताबिक, उनके अलावा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सहानी और स्वाति मालीवाल भी बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं. इनमें से अकेली स्वाति मालीवाल दिल्ली से राज्यसभा सांसद हैं. बाकी छह सांसद पंजाब के कोटे से राज्यसभा भेजे गए हैं इसलिए आम आदमी पार्टी उनके बीजेपी में जाने को पंजाब के लोगों के साथ धोखा करार दे रही है.
आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पंजाब की आप सरकार के साथ “ऑपरेशन लोटस का खेल खेला जा रहा” है. उन्होंने कहा, “हमारे सांसदों को तोड़ा जा रहा है, उनको अपनी पार्टी में जोड़ा जा रहा है, ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल किया जा रहा है.” उन्होंने अशोक मित्तल के पार्टी छोड़ने को कुछ दिनों पहले उनके ठिकानों पर हुई ईडी की छापेमारी से भी जोड़ा.
आम आदमी पार्टी में टूट, राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने का दावा
आम आदमी पार्टी को शुक्रवार, 24 अप्रैल को एक बड़ा झटका लगा है. पार्टी के तीन राज्यसभा सांसदों- राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि वे आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो तिहाई सांसद, संवैधानिक प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए बीजेपी में शामिल होंगे.
राघव चड्ढा ने कहा, “राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 10 सांसद हैं और दो-तिहाई से ज्यादा सांसद इस मुहिम में हमारे साथ हैं, उन्होंने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं और हमने आज सुबह राज्यसभा चैयरमैन को उनके हस्ताक्षर वाला पत्र सौंप दिया है.” राघव चड्ढा ने बताया कि क्रिकेटर और आप सांसद हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी बीजेपी में शामिल होंगे.
राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे पार्टी की गतिविधियों से इसलिए अलग हो गए थे क्योंकि वे उनके “गुनाहों” में शामिल नहीं होना चाहते थे. चड्ढा ने अपने फैसले के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी अब अपनी “मूल विचारधारा से भटक गई” है और अपने व्यक्तिगत फायदों के लिए काम कर रही है. उन्होंने कहा, “मुझे लग रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही व्यक्ति हूं.”
युद्ध और मदद की कमी के चलते इस साल दुनिया भर में बढ़ेगी भुखमरी
युद्ध, सूखे की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मदद में आई कमी के चलते इस साल दुनियाभर में भुखमरी के और बढ़ने का खतरा है. खाद्य संकटों पर वैश्विक रिपोर्ट 2026 में चेतावनी दी गई है कि दुनिया के कुछ सबसे कमजोर देशों में खाने का संकट और बढ़ सकता है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में 47 देशों और क्षेत्रों में करीब 26.6 करोड़ लोगों ने गंभीर खाद्य संकट का सामना किया. हैती, माली, गाजा, दक्षिणी सूडान, सूडान और यमन जैसे देशों में करीब 14 लाख लोगों ने भुखमरी की भयावह परिस्थितियों का सामना किया.
2025 में दुनियाभर में करीब 3.5 करोड़ बच्चे कुपोषण से जूझ रहे थे और इनमें से करीब एक करोड़ बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल भी स्थिति गंभीर बनी हुई है और सिर्फ हैती में ही स्थिति थोड़ी सुधरने की उम्मीद है.
आशंका है कि 2026 में अकेले नाइजीरिया में ही करीब 40 लाख और लोग भुखमरी का सामना करेंगे. सोमालिया और केन्या जैसे देशों में भी खाद्य संकट बढ़ सकता है, जहां सूखे की स्थिति, महंगाई और मदद में कटौती से स्थितियां और बदतर हुई हैं.
चीन ने कहा, विदेशी कंपनियों के साथ घरेलू कंपनियों जैसा ही व्यवहार होगा
बीजिंग में आयोजित चाइना डेवलपमेंट फोरम में चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने कहा कि देश अपनी अर्थव्यवस्था को विदेशी कंपनियों के लिए और अधिक खोलेगा और वैश्विक साझेदारों के साथ संतुलित व्यापार को बढ़ावा देगा. अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ पिछले एक साल में बढ़े टैरिफ और व्यापार तनाव के बीच उन्होंने भरोसा दिलाया कि चीन ज्यादा गुणवत्ता वाले विदेशी सामान आयात करेगा और “सभी पक्षों के साथ मिलकर संतुलित और बेहतर व्यापार विकास को आगे बढ़ाएगा.” यह दो दिवसीय फोरम चीन के आर्थिक विजन और निवेश के मौके दुनिया के सामने रखने का अहम मंच माना जाता है.
2025 में चीन का व्यापार अधिशेष रिकॉर्ड 1.2 ट्रिलियन डॉलर रहा, लेकिन बढ़ती वैश्विक चिंताओं, जैसे ओवरकैपेसिटी और चीनी उत्पादों पर निर्भरता को लेकर सरकार सतर्क दिखी. केंद्रीय बैंक गवर्नर पैन गॉन्गशेंग ने कहा, “वैश्विक आर्थिक असंतुलन को समझने के लिए सिर्फ सामान नहीं, सेवाओं और वित्तीय खाते को भी देखना जरूरी है.”
विदेशी निवेश में गिरावट को पलटने के लिए चीन ने कई कदम उठाए हैं. जनवरी में निवेश में गिरावट के बाद सरकार ने सैकड़ों सेक्टरों में टैक्स छूट और अन्य प्रोत्साहन दिए हैं. ली कियांग ने भरोसा दिलाया कि विदेशी कंपनियों को घरेलू कंपनियों जैसा ही व्यवहार मिलेगा, ताकि वे चीन में भरोसे के साथ अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकें. इस फोरम में टिम कुक सहित कई बड़ी वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए.
मादुरो को पकड़ने की गुप्त जानकारी पर सैनिक ने लगाया सट्टा, 4 लाख डॉलर से ज्यादा जीता
अमेरिका में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां स्पेशल फोर्स के सैनिक गैनन केन वैन डाइक पर गोपनीय सैन्य जानकारी का गलत इस्तेमाल कर ऑनलाइन सट्टेबाजी से 4 लाख डॉलर से ज्यादा कमाने का आरोप लगा है. न्यूयॉर्क के फेडरल अभियोजकों के मुताबिक, वैन डाइक जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने वाले ऑपरेशन का हिस्सा थे और इसी दौरान मिली संवेदनशील जानकारी का इस्तेमाल उन्होंने ‘पॉलीमार्केट’ नाम के प्लेटफॉर्म पर दांव लगाने के लिए किया. उन पर गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग, धोखाधड़ी और गैरकानूनी वित्तीय लेन-देन जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
जांच में सामने आया कि वैन डाइक ने दिसंबर के आखिर में अपने निजी बैंक खाते से करीब 35,000 डॉलर क्रिप्टो खाते में ट्रांसफर किए और फिर मादुरो के सत्ता से हटने के समय को लेकर कई दांव लगाए. अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन दांव से उन्हें 4,04,000 डॉलर से ज्यादा का मुनाफा हुआ. एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल ने कहा, “एक अमेरिकी सैनिक ने अपने पद का फायदा उठाकर एक सही सैन्य अभियान से निजी लाभ उठाने की कोशिश की.”
इस मामले के सामने आने के बाद प्रेडिक्शन मार्केट्स पर सख्त नियम बनाने की मांग तेज हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की हरकतें न सिर्फ कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सैनिकों की जान को भी खतरे में डाल सकती हैं. वहीं, कंपनी ‘पॉलीमार्केट’ ने भी कहा है कि उसने संदिग्ध गतिविधि की जानकारी खुद अमेरिकी न्याय विभाग को दी और जांच में पूरा सहयोग किया.
ताइवान को हथियार बिक्री पर चीन का यूरोप पर एक्शन, 7 कंपनियों पर निर्यात प्रतिबंध
चीन ने ताइवान को हथियारों की बिक्री के मुद्दे पर यूरोप की सात कंपनियों पर सख्त कदम उठाते हुए दोहरे उपयोग वाले सामान के निर्यात पर रोक लगा दी है. वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि इन कंपनियों को एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में डाल दिया गया है. बयान में जर्मनी की रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी हेंसोल्ट एजी और बेल्जियम की एफएन ब्राउनिंग जैसी कंपनियों का नाम शामिल है, जिन पर ताइवान के साथ “मिलकर काम करने” या हथियार सौदों में शामिल होने का आरोप है.
ड्यूल-यूज आइटम ऐसे सामान, सॉफ्टवेयर या तकनीक होते हैं जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य, दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जैसे ड्रोन और चिप्स बनाने में काम आने वाले कुछ रेयर अर्थ एलिमेंट्स. मंत्रालय ने साफ किया कि अब कोई भी विदेशी संस्था या व्यक्ति चीन से जुड़े ऐसे सामान इन सात कंपनियों को ट्रांसफर नहीं कर सकता और इससे जुड़ी सभी गतिविधियां तुरंत रोकनी होंगी. हालांकि चीन ने यह भी कहा, “ये कदम सिर्फ ड्यूल-यूज आइटम तक सीमित हैं और सामान्य व्यापार पर इसका असर नहीं पड़ेगा.”
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की सरकार इस दावे को खारिज करती है और कहती है कि वहां के लोग खुद अपना भविष्य तय करेंगे. यूरोप आमतौर पर चीन की नाराजगी से बचने के लिए ताइवान को बड़े हथियार नहीं बेचता, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद मध्य और पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्सों में ताइवान के लिए समर्थन बढ़ा है.
हंगरी में ओरबान की हार के बाद रूस पर और सख्त ईयू प्रतिबंधों की तैयारी तेज
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान की चुनावी हार के बाद रूस पर यूरोपीय संघ के और कड़े प्रतिबंध लगने की संभावना बढ़ गई है. ओरबान पिछले कुछ सालों से इन प्रतिबंधों को रोकते रहे थे. यूरोपीय संघ की शीर्ष राजनयिक काजा कलास ने शुक्रवार को निकोसिया में हुए ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि अब 21वें प्रतिबंध पैकेज को अंतिम रूप देने की तैयारी है. उन्होंने साफ कहा, “यह रूस को बहुत स्पष्ट संदेश देता है कि वे हमें इंतजार करवाकर नहीं जीत सकते.”
कलास ने यह भी संकेत दिया कि जिन कदमों को अब तक हंगरी के विरोध की वजह से टाल दिया गया था, उन पर फिर से विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा, “हमें पहले तय की गई सीमाओं पर भी दोबारा नजर डालनी चाहिए.” इसमें रूस के ओलिगार्ख्स और रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च के उन प्रतिनिधियों पर कार्रवाई शामिल हो सकती है, जो यूक्रेन युद्ध का समर्थन करते हैं.
दरअसल ईयू ने गुरुवार को ही 20वें प्रतिबंध पैकेज पर मुहर लगाई है, जब क्रेमलिन समर्थक माने जाने वाले ओरबान ने आखिरकार अपनी महीनों पुरानी आपत्ति वापस ले ली. यह फैसला उनके 16 साल लंबे शासन के अंत का संकेत भी माना जा रहा है. नए प्रतिबंधों का मकसद रूस की गैस और तेल बिक्री से होने वाली कमाई को और कम करना है, साथ ही कुछ वित्तीय संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली से बाहर करना और व्यापार पर अतिरिक्त पाबंदियां लगाना भी इसमें शामिल है.
अमेरिका ने भारतीय सोलर सैल और पैनलों के आयात पर शुल्क लगाया
अमेरिका ने भारत में बने सोलर सैलों और पैनलों के आयात पर प्रारंभिक एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की घोषणा की है. इंडोनेशिया और लाओस के सोलर उत्पादों पर भी यह शुल्क लगाया जाएगा. अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद फैक्टशीट के मुताबिक, एजेंसी ने भारत के लिए करीब 120 फीसदी, इंडोनेशिया के लिए 35 फीसदी और लाओस के लिए 22 फीसदी प्रारंभिक शुल्क दर की गणना की है.
इन तीन देशों ने 2025 में अमेरिका को करीब 4.5 अरब डॉलर के सोलर उत्पाद निर्यात किए थे. यह अमेरिका के सोलर आयात का करीब दो तिहाई यानी 66 फीसदी है. प्रारंभिक शुल्क लगाने के फैसले से इन देशों के सोलर निर्माताओं को झटका लगेगा जो अपना माल अमेरिका को निर्यात करते थे. अमेरिका ने इन देशों में काम कर रही कंपनियों पर अमेरिकी बाजार में सस्ता माल डंप करने का आरोप लगाया है.
अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालय ने फरवरी, 2026 में इन तीनों देशों से सोलर सैलों और पैनलों के आयात पर प्रतिपूरक शुल्क लगाने की भी घोषणा की थी. अमेरिका ने तब कहा था कि इन देशों में सोलर निर्माताओं को सरकार की ओर से सब्सिडी मिलती है, जिसके चलते अमेरिकी उत्पाद उनसे मुकाबला नहीं कर पाते.