
मेरे रक़ीब को खबर कर दो… की मैं जिंदा हूँ
उसे ये भी खबर कर दो… की मैं मोहब्बत हूँ ।।
तू कोशिशें बार बार कर… मुझे क़त्ल करने की
किस्से मेरे ही दोहराएंगे ये जमाना… की मैं मोहब्बत हूँ ।।
हर सख्स ने है गुनाह किया… मुझसे मिलने के बाद
वो चुनवा दिये दीवारों पर… की मैं मोहब्बत हूँ ।।
यज्ञ कोई उम्मीद की दहलीज नहीं… इस शहर में
चल कहीं दूर चल… की मैं मोहब्बत हूँ ।।




बुराईयाँ तो है बहोत, है उस सख्स में
मेरे हुक्मरान बड़े मस्त है
अब गुज़ारिश है ये जो खाक बची है मेरे फ़ना होने के बाद
