कुछ नाच नचाया जाये …

झूठ क्यों और कब तक
बोला जाये
क्या… केवल वोट के लिये
ही, झूठ बोला जाये ।।

अन्य किसी कारणों से
झूठ अपराध हो सकता है
किन्तु राजनीति में ही
झूठ क्षमा हो सकता है ।।

वचन अनमोल है
व्यर्थ किया जाये
झूठ के सहारे
चलो चुनाव लड़ा जाये ।।

कुछ बातें कुछ कहानीयाँ
कुछ जुमलें बनाया जाये
राजनीति के अंगीठी में
कुछ अपना रोटी पकाया जाये ।।

ऊँगलीयाँ अधिक कर लिये
नेता राजनेता… अब
अब, जनता ऊँगली कर
उन्होंने कुछ नाच नचाया जाये ।।

पहला वर्ष… हमारे साथ के

लो एक वर्ष बीत गया
कलमकारों के बीच
लड़खड़ाते हुये मुझे चलते हुये
मन का स्पर्श व्यथा
व्यक्त करते शब्दों को संजोते हुये
अब एक रिस्ता सा बन गया है
निभाते निभाते जुड़ते जुड़ते
आप सभी के प्रतिक्रियाओं से
सीख मिला , प्रेरणा मिला
साहस मिला, प्रोत्साहन मिला
आपका सभी का आभार, धन्यवाद
इस प्यार को देने के लिए
लो अब बीत चुका
पहला वर्ष हमारे साथ के ।।

मंथन… चिंतन… मनन

उलझन, समस्या हो
या फिर कोई कठिनाई
या चिंता हो
मन को घेरे हुये
या फिर हो कोई प्रश्न
उत्तर या समाधान के लिए
करना होता है
चिंतन मनन या फिर… मंथन ।।

मंथन अपने कृत्य का
मंथन अपने आचरण का
मंथन अपने शब्दों का
मंथन अपने दोस्तों का
मंथन अपने समय का
भूल चूक से अमृत
हलाहल (विष) हो सकता है ।।

जैसे कि … मैं

एक शब्द है
जिसके अर्थ कई
जिसे ठुकराये है कई
जिसे अपनाये है कई
जिसके प्रश्न है कई
जिसके उत्तर है कई
जिसके मित्र है कई
जिसके शत्रु है कई
जिसमें डूबे है कई
जिसने अतीत लिखा है कई
जिसे पाने को युद्ध हुये है कई
है कई फिर भी, है अकेला
बेचारा प्रेम शब्द
जैसे कि… मैं ।।

जनमत मिलेगा किसे ???

ढोल तासे नगाड़े गूंज रहे
गली गली द्वंद गूंज रहे
कहीं टूट रहे , कहीं जुड़ रहे
न जाने किन किन बातों को खींच रहे
अंगीठी फिर जल उठी है लोकतंत्र का
कोई अपना खिचड़ी पका रहा
कोई रोटी अपना सेक रहे
खाली है , कौन बैठेगा
सिंहासन पर , विचार सब कर रहे ।।

दाव ऐसे ऐसे है
निर्दोष जाल में फसे जा रहे
कट रहे मिट रहे जल रहे इस आग से
शतरंज के दाव पर हम पयादे बन रहे ।।

कर रहे है शंखनाद
वादों के शस्त्र चला रहे
कई घालय हुये
कईयों को आंखे दिखा रहे
उन्माद में अभिमान में
उल्टे सीधे कृत्य कर रहे
जनमत मिलेगा किसे ?
इस प्रश्न को और सुदृढ़ बना रहे ।।

नमामि नमामि परमेश्वरी जगदीश्वरी माँ

नमामि शिवदूती शिवी मुण्ड मुण्ड श्रृंगारणी
नमामि अष्टभुजी गौरी महिषासुर विदारणी ।।

जय चरा चरा सवर्त्र निवासिनी
जय जगजननी सकल सिद्धिदायनी ।।

जय जय कमला कात्याणी ब्राम्हचारणी माँ
जय कालरात्रि सिद्धिदात्री मंगलकरणी माँ ।।

जय शैलपुत्री चन्द्रघंटा स्कन्द भवानी माँ
जय कूष्माण्डा जय जय दुर्गा भवानी माँ ।।

जय मधुकैटभ शुम्भ निशुम्भ विदारणी माँ
जय जगतप्रतिपालिका संकट हरणी माँ ।।

नमामि नमामि महेशभामनी शंकरी माँ
नमामि नमामि परमेश्वरी जगदीश्वरी माँ ।।

चलो इश्क़ करते है …

चलो कुछ हौसला करते है, तूफां में दीये रखते है
चलो जमाने को सिखलाये सबक, चलो इश्क़ करते है ।।

तुम आग हो तो आग ही सही
हम भी इश्क़ है, हमसे भी लोग जला करते है ।।

है तेरे शहर शिकारी तो, चलो ललकार चलते है
हम इश्क़ के है परिंदे , चलो उड़ान भरते है ।।

उसमें है हुनर क़त्ल करना का, हमे आसमां छूने का
चलो करे दीवारे सरहदों को पार, चलो इश्क़ करते है ।।