
वक़्त बढ़ता रहा और मैं घटता रहा
उम्र बढ़ती रही और जिंदगी घटती रही
हम हम थे तुम तुम थे
और दौर मोहब्बत की यूँही चलती रही ।।
वो बेजान से थे मगर
साँसों का आना जाना चलती रही
शायद वो अब भी है तलबगार तेरा
वो खुले नज़रों से इंतजार करती रही ।।
वो खता खता ही रही
मैं तन्हा तुम तन्हा और इश्क़ तन्हा ही रही
ऐसे ही तुम भी हम भी बदलते रहे
और यूँही आशिकी की दौर बदलती रही ।।
यूं ही जिंदगी के लुफ़्त उठाते रहे
हम कभी वो कभी वक़्त दांव चलती रही
बनते बिगड़ते रहे रिस्ते
और फासलें बढ़ती रही कभी घटती रही ।।
## Happy New Year ##








