
अब आगाज हो
नई कल का शुरुवात हो
जवाब हो जवाब हो
मुह तोड़ जवाब हो ।।
धैर्य अब छूट रहा
रगों में रक्त फुट रहा
क्रोध एकत्र हो रहा
नेत्र भी अंगार बरस रहा ।।
शस्त्र मियान से निकलेंगे कब
प्राण शत्रु के छूटेगें कब
मृदंग और ताल को बजाओगे कब
काल के विक्राल को जगाओगे कब ।।
शंख फूक कर
प्राण फूक कर
चल गगन पे दहाड़ कर
चल अपने कृपाण निकाल कर ।।
वेदना का तांडव दिखाना होगा
प्रिय प्रियतम के वियोग को समझना होगा
सर्वस्य नाश होगा
हर रक्त का कर्ज देना होगा ।।
डिगा नहीं सकती
झुका नहीं सकती
घृणित कृत से
हिन्द को डरा नहीं सकती ।।
अब एक अवसर चाहिये
वीर को शौर्य चाहिये
उफनती नशों को अब
प्रतिशोध चाहिये ।।
केसरिया साफा पहना केसरिया जो जाऊँगा
या लपट तिरंगे में आऊँगा
शांति हरियाली के रंग खिल गये बहोत
अब शौर्य का परचम लहराऊँगा ।।
भस्म भभूति अंग लगाऊँगा
अंगार अभी और धधकाऊँगा
ये जलन ये तपन रहेगी जब तक तब तक
उन कायरों का शीश खंडित कर न आऊँगा ।।
अब टकरायेंगे चाहे शीशा पत्थर
चूर हो जायेंगे हर कंकड़ पत्थर
न चुनेंगे अब कंकड़ पत्थर
घुन चना पिसेगा हर पत्थर ।।
जय हिंद… वन्दे मातरम्