
दिल नाफरमानी करता है बहोत
तुझे देख दिल मचलता है बहोत ।।
कभी पास से कभी दूर से निहारता है
पर खामोश रहता है बहोत ।।
दिल कि फितरत बदल गई
खुद से बातें करता है बहोत ।।
बर्ताव करता है मरीज़ का
और गैरों को दवा देता है बहोत ।।

दिल नाफरमानी करता है बहोत
तुझे देख दिल मचलता है बहोत ।।
कभी पास से कभी दूर से निहारता है
पर खामोश रहता है बहोत ।।
दिल कि फितरत बदल गई
खुद से बातें करता है बहोत ।।
बर्ताव करता है मरीज़ का
और गैरों को दवा देता है बहोत ।।

पुराने घर में जब मैं लौटा
तो सिमटे रिस्ते मिले
कुछ यादों के जाले
कुछ बचपन के सपने मिले
कुछ टूटे हुये खिलौने
कुछ बिछड़े हुये दोस्त मिले
पर जब ये सब मिले
ऐसे मिले जैसे
कभी बिछड़े नही थे ।।
आज नये घर पे
रिस्तों में धूल जमा गई
यादों को जगह नहीं
सपने के लिए समय नहीं
खिलौने के लिए दोस्त नहीं ।।

लापता है हजारो , हजारो के भीड़ में
हम हैं तुम भी हो , जमाने के भीड़ में ।।
लोग आज जान कर अनजान हो जाते है
आईने पहचान पूछते है पराये के बीच में ।।
लिख कर पढ़ कर इश्क़ की दास्तान
मैं शून्य हो गया गुम हो गया दीवानों के भीड़ में ।।

सुना है वो तालीम-ए-मोहब्बत देते है
और वो इश्क़ को आग कहते है
दरिया न कूदने कि नसीहत है उसकी
और जो डूब गया उसे पार कहते है ।।
वो नज़रों में रखते है शोले
जो गुस्ताख़-मोहब्बत कहते है
फ़ना करने को मिटाने को
दिन रात चालें चलते है ।।
हबीब से साये है
और रक़ीब के फितरत रखते है
जुबाँ है शहद के
और दिल करेले के रखते है ।।

सेहत खजाना होये, यज्ञ कर ले कछु योग
तन मन सुदृढ़ होय रे, नित्य करे जो योग ।।
थोड़ा दायें बायें घूम
थोड़ा पेट सपसपा ले
कभी खोपड़ी नीचे कर
कभी पैर ऊपर उठाले
कभी शांत बैठ
एकांत बना ले
योगा करके… 🙌🚶🙋🏃🙆
अपनी सेहत बना ले ।।

बहोत देर से खामोशी गुनगुना रही थी
मेरे दिल को दिल से सदा आ रही थी
सच कह दें या ईमान बेच दें
बहोत देर से पेट को भूख जला रही थी ।।
क्या हुआ “यज्ञ” तेरी नजरों को
वो क्यों अस्क बहा रही थी
ट्विंकल तेरा लहू तो नहीं
फिर क्यों तेरा दिल भीगे जा रही थी ।।
अपने ही गलियों में आज बदनाम हूँ बहोत
हर जुबाँ पर तेरा नाम सवाल उठा रही थी
अब मुसाफिर हो चला इन गलियों का
दिल भी सुनकर इसे लुफ्त उठा रही थी ।।
तक़दीर का खेल देखा, वो मासूम कद धूप में तपी जा रही थी
वो मजबूर थी शायद, धूप कम पेट भूख अधिक तपा रही थी ।।








कुछ याद है कुछ सुनी है मैंने
उनकी ऊँगली थाम कर चलना
घोड़ा बन कभी सैर कराना
कभी कंधे पर दुनिया दिखाना
तो कभी अपने गोद पर बैठाल
सीता राम राधे श्याम भजवाना
छोटी छोटी खुशियों को खरीद
मेरे लिए एक नई दुनिया बनाना
कभी कर्तव्यों तो कभी मेरे फीस में दबना
गलतियों पे डाँटना कभी मारना
मार कर भी दुलार करना
कुछ अपने लिए कुछ हमारे लिए संघर्ष करना
स्वयं के लिए कम हमारे लिए अधिक जीना
अपने जरुरतों को कांट हमारा पूरा करना
इतना सहज नहीं होता होगा पिता बनना ।।
hindi poems, Stories
Layers Of Life
only talk on love for humanity
मैं रहूँ ना रहूँ मेरे अल्फ़ाज़ जाविदां हैं, कल मिलू ना मिलू यह अंदाज़ अलहदा है...
Imthestory
A daily selection of the best content published on WordPress, collected for you by humans who love to read.
VOICE OF SOUL