बेवफ़ा … दिल

कहीं दिल बेवफ़ा हो ना जाये
खुद से जुदा हो ना जाये ।।

दुनिया के तानों के कारण ऐ दिल
चाह के भी उसे भूल ना पाये ।।

ये जिंदगी कर्जदार हो ना जाये
ये जिंदगी उधार हो ना जाये ।।

तेरे मेहरबानीयों के तले यज्ञ अब
अपने साँसों पर भी हक़ खो ना जाये ।।

मेरे हो …

आस पास तुम्हारा
होना ना होना
मायने नहीं रखता
अब इस दिल को
तुम जो दिल में बसे हो
साँवरे … तुम जहाँ भी हो
मेरे हो … हाँ मेरे हो ।।

खामोश ही रहने दो …

जबाँ को कुछ खामोश ही रहने दो
नज़रो को कुछ बयाँ ही करने दो ।1।

बेवजह जमाने को क्यों खबर हो
दिल बात दिल में ही रहने दो ।2।

यक़ीन बुलंद कर अपना
लोगो को झुठ फैलाने दो ।3।

फासले लाख सही दरमियाँ
शक का काँटा ना चुभने दो ।4।

रंज लाख सही रिस्तों में यज्ञ
उसे दिल में जहर ना भरने दो ।5।

इतिहास की तरह …

ये शाम बीत जाएगी हर शाम की तरह
याद फैल जाएगी किसी आग की तरह ।।
डूब जाएंगे तेरे यादों में लम्हा लम्हा
रंग लायेगी ये किसी जाम की तरह ।।

कोरा है पन्ना अभी लिखी पढ़ी जाएगी
तेरा मेरा इश्क़ रहेगा मिसाल की तरह ।।
रंग रुप बदल जाएगी वक़्त की तरह
यज्ञ रह जाएगी इश्क़ इतिहास की तरह ।।

हर हर महादेव …

देवादि देव देवेश्वराः जगत परमेश्वराः
महेश्वराः दुरन्धरः आदिदेव शंकरः
जय त्वम उमानाथ नीलकंठ महादेवम् ।।

ज़िद्दी मन …

ज़िद्दी मन
मेरा एक तुझमें ही डूबा है
और इससे कुछ काम नहीं दूजा है
मन कभी पर्वत सा विशाल
कभी अस्थिर हो जाता है
कभी कभी तो मन मेरा
ज़िद करता है अंबर से टकराने को
और कभी मन बच्चा सा हो जाता है
चाँद की ज़िद करता
उसके चाँदनी को चाहता है
कभी ज़िद्दी मन चकोर सा निहारता है ।।

तुम्हारी है …

वो दौरे-इश्क़ था
ये जामे इश्क़ है
कल शाम तुम्हारी थी
आज जाम तुम्हारी है ।।

वो कहते है क्यों डूबे हो
ये कैसी खुमारी है
हम भी कह दिये
प्यालों पे ना जा
देख निगाहों में
इनमें नशा तुम्हारी है ।।

आज करे या कल करें
बात करें जब भी करें
वो हर बात तुम्हारी है
जब भी बहके शाम
जब भी छलके जाम
निगाहों से बहता जो पानी है
ये निशानी फक़त तुम्हारी है ।।