
लौट चले हम
कि परदेश में
दर्द देश का
कौन जाना है
अपने मिट्टी को
जिन्हें याद नहीं
वो किसी’के
इश्क़ को
कहाँ जाना है
अब लौट चले हम
कि देश की
प्रीत को पाना है ।।

लौट चले हम
कि परदेश में
दर्द देश का
कौन जाना है
अपने मिट्टी को
जिन्हें याद नहीं
वो किसी’के
इश्क़ को
कहाँ जाना है
अब लौट चले हम
कि देश की
प्रीत को पाना है ।।

मेरी जननी
जो मेरे सारे
नखरे सहती है
और फिर अपने
शीतल शांत
मन से सदा
दुआ ही देती है
लालन पालन
करती है
ये सृष्टि
… मेरी माँ ।।

एक दीप अपने संस्कृति के लिए
एक दीप अपने संस्कार के लिए
एक दीप अपने विजय के लिए
एक दीप मन रौशन के लिए
एक दीप घर रौशन के लिए
एक दीप सीमा के वीरों के लिए
अनेक दीप अपने राष्ट्र के लिए
जलाना है…
सुख शांति वैभव
सदा उल्लास रहे
ऐसे दीपउत्सव मनाना है
।। दीपावली की अनेक अनेक शुभकामनाऐं ।।

सुबह हुई तो जाना
मेरी पनाहों में तुम थे
वो सब ख़्वाब था,
हकीकत चुभने लगा
की वो सब ख़्वाब था
पर हकीकत को
स्वीकार करना भी
जरुरी था… कि
सुबह तो होना ही था
ख़्वाब को हकीकत करने को
इसलिए…
मुझे दिन से भी प्यार है
और रात से भी प्यार है ।।







तुम हो तो
ये चाँद सूरज
ये दिन रात का होना
सितारों का
होने का मतलब है
नहीं तो
कैसी रातें
कैसे दिन
सब बेवजह है
तुम बिन … !

रंज तंज
गिले सिकवे
और कुछ जो हो
नफ़रत जैसा
दीपावली कि
सफाई के जैसे
इनको भी
निकल फेंक दे
और…
अच्छी चीजों को रखें
अपने दिल में
जैसे कि…
प्यार मोहब्बत
यारी दोस्ती
तुम्हारी यादें
और तुम्हें

दिल का हाल किसी को ना बतलाना
वरना तरस खा के लोग धोखा दे जाएंगे ।1।
इश्क़ में मैं डूबा हूँ टूटा हूँ …तो क्या
मग़र ये जान लो हम धोखा न दे पाएंगे ।2।
फ़ना एक दिन तुझे मुझे सब को होना है
आज मर के हम मोहब्बत को अमर कर जाएंगे ।3।
बहोत दूर तक फैली है नफ़रत की आग
इसमें ख़ाक हो कर हम मोहब्बत फैलाएंगे ।4।





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मैं रहूँ ना रहूँ मेरे अल्फ़ाज़ जाविदां हैं, कल मिलू ना मिलू यह अंदाज़ अलहदा है...
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