मेरी माँ … My Mother

मेरी माँ
धर्म कर्म गुरु है
इस धरा में मेरे लिए
ईश्वर का स्वरूप है
संस्कृति संस्कार है
मेरे लिए
सही गलत का ज्ञान है
ममता की धारा
करुणा की सागर
मेरे गलती को
सुधारने वाली
धर्म कर्म के पथ पर
चलाने वाली गुरु है ।।

महाराणा प्रताप …

जो करे अपमान मातृभूमि का
उसका प्रतिरोध होना चाहिए
जो विद्रोही हो मातृभूमि का
उसका प्रतिरोध होना चाहिए ।1।

अस्मिता को जीवित रखना हमें
वीर राणा से सीखना चाहिए
राणा की घाँस रोटी से हमें
परिस्थिति से लड़ना सीखना चाहिए ।2।

मान और समान के लिए लड़ें तो
हल्दीघाटी सा युद्ध होना चाहिए
शौर्य का मिसाल देखना होतो
महाराणा प्रताप को पढ़ना चाहिए ।3।

तुझे तो बस चलना है …

मंज़िल मिले न मिले
पर चलना ज़रुरी है यज्ञ
राह में मंज़िल भटक सकता है
भटके राह मिल सकतें है
तू क्यों ये सब सोंचे है यज्ञ
वक़्त बदलता रहता है
तक़दीर की लक़ीर बदलती रहती है
तू क्यों ये सब सोंचे है यज्ञ
क्या मिलना क्या खोना
तू सब छोड़ दे इन राहों पे
तुझे तो बस चलना है यज्ञ
जिंदगी में सफ़र करना है यज्ञ ।।

उम्मीद की चमक

उम्मीद की चमक
बरसों से
मेरे आँखों पर सजी है
मैं मज़दूर
एक दिन नींव
अपने घर का भी बनाऊंगा
छोटा सा ही सही
अपना घर सजाऊंगा ।।

हाँ, मैं मजदूर हूँ …

हाँ , मैं मजदूर हूँ
इसलिए अपना कर्म करता हूँ
लहू खौला कर धूप में
अपना पसीना बहता हूँ
कभी मंदिर मस्जिद
कभी कारखाने दफ्तर
कभी मैं सपनों का घर बनाता हूँ
मुझे दूसरों के कर्म से क्या
कि कारखाने में काम कौन करे
वो दफ्तर कैसे चलता है
उस घर में कौन रहता है
मैं तो मजदूर हूँ
बस घर बना जानता हूँ
हाँ , मैं मजदूर हूँ
बस अपना कर्म करता हूँ ।।