जन्म से इंसान कर्म से दैत्य हूँ राम
मेरे मन के रावण को मार दे राम ।।

दिशा दिखे न राह है जाना कहाँ राम
भट था हूँ जीवन को उद्देश्य दे राम ।।
मैं दीन तेरे चरणों का दर्श पाऊँ राम
के मेरे मन के पाप को मिटा दे राम ।।
अंधियारा मलिन मन को कैसे धोऊँ राम
मुझ पर कोई अग्निअस्त्र चला दे राम ।।
ऐसी हार का मैं बखान क्या करूँ राम
जीत मुझे मिले हार कर तुझसे राम ।।


