जायका बदलने लगा …

खुश रहने के
बहाना ढूंढने लगा
के दिल को दर्द अब
प्यारा लगने लगा ।।

कई दफा मिले हम
नज़रें भी मिली
शोरशराबा अब
दिल को पसंद नहीं
दिल को टकरार पसंद नहीं
के जुबां अब
खामोश रहने लगा ।।

खरीदारी से
बहोत दूर रहता था
मिलना जुलना भी
कम करता था
लेन देन कि भी
आदत नहीं था
पर दिल अब
तोहफे खरीदने लगा ।।

नुक्कड़ की चाय फ़ीकी
और पान पसंद तो नहीं
फिर भी कई शाम
गुजरे है वहाँ
के जिंदगी का अब
जायका बदलने लगा ।।

धोखा …

धोखा तुम गैरों को दे सकते हो
यज्ञ… पर तुम
क्या अपने दिल को दे पाओगे ।।

नज़र भर कर देख
ज़माने में रौशनी है
आँख बंद करके
क्या इसे झुठला पाओगे ।।

और बहते पानी को बहने दे
कुछ देर के ठहराव से
सागर से मिलने को
नदी को क्या रोक पाओगे ।।

सच की डोरी थम रे यज्ञ
जीवन की हकीकत पहचान रे यज्ञ
वक़्त के साथ चलना सीख
कोई जतन से क्या वक़्त रोक पाओगे ।।

मुलाकात …

आ के तो बैठिये
पास नहीं तो
दूर ही बैठिये
तुम ऐसी वैसी
इसकी उसकी
बातें कर लेना
हम तो तुम्हें
देखेंगे सुनेंगें
फिर चले जाएंगे
कोई बहाना ढूंढेंगे
और …
मुलाकात करेंगे ।।

लिखता हूँ …

ख़्याल लिखता हूँ कुछ सवाल लिखता हूँ
बस मैं अपनी जिंदगी का बवाल लिखता हूँ ।।

यज्ञ पाक पुरनूर सा इश्क़ जब किया मैंने
उस दर्द के ज़ख्म का मैं हाल लिखता हूँ ।।

कुछ पाया कुछ खोया जो हँसी खुशी मैंने
ज़रा पढ़ना सुनना उसे मैं कमाल लिखता हूँ ।।

इंसान बना देना …

गुरु मुझको भी आज़ाद भगत सुभाष बना देना
मेरा सज़दा मेरा ईमान एक तिरंगा बना देना
मेरा दर्द मेरा चैन सब वतन के वास्ते हो
गुरु मुझको भी एक ऐसा इंसान बना देना ।।

मेरा जीना मेरा मरना हो जिसके वास्ते
गुरु मुझमें भी वो वतन की प्रीत जगा देना
रगों में बहती रही जब तलक रवानगी मेरी
गुरु मुझमें भी वो दीवानगी हिंद का जगा देना ।।

नहीं पाया

इस ज़माने में सही कुछ भी नहीं पाया
आदमी को आदमी सा अब नहीं पाया ।।

माथे पे सिकन लिए अब फिरते है सभी
हर शख़्स दिल में आज सुकून नहीं पाया ।।

इश्क़ भी करते है और निभाते भी नहीं
दीवानों के जिह्न में आज वफ़ा नहीं पाया ।।

दौर ए मुश्किल यहाँ किसने नहीं देखा
कौन है जो इस जहान में ग़म नहीं पाया ।।

यज्ञ क्यों बेजुबान से हो गये हो तुम
सच को सच कहते तुझे कभी नहीं पाया ।।

जायका … चाय का

वो हँसती है वो रुठती है ऐसे ही खेल खेलती है
जायका मेरे चाय का उसके मिज़ाज़ से ही बनती है ।।

दर ओ दीवार महकेगी या शोर ओ गुल रहेगा घर
रंगत चाय की दिन कैसे गुजरेगी ये बता जाती है ।।

हो गर दिल खट्टा तो चाय की दूध फट जाती है
टपक जाय जब प्यार के आँसू तो चीनी बन जाती है ।।

मैं बहक जाता हूँ  जब वो कुछ ऐसे जवाब देती है
भूले से नमक डाल तुझमें मैं गुम थी जब वो कहती है ।।

धूप जलेगी …

देखतें है जनाब
कब तक
ग़म के आँसू उबलेगी
और …
मेहनत के पसीने
क्या क्या बनेगी ।।

ये जिंदगी है ज़नाब
यहाँ …
कुछ तो होगा ही
या …
भूख के ताप से
पेट जलेगी
या फिर
तवे पर
रोटी सीकेगी ।।

ज़नाब …
रोटी दो मिले
या आधी
बात बस इतनी है
ईमान का
नमक मिला हो तो
देखिएगा ..
जायका
कुछ अलग मिलेगी ।।

साहब …
यहाँ हर हाँथ को काम
और
हर पेट को रोटी मिलना
इतना आसान है
पत्थर तुड़वा लो
या समान उठा लो
दिहाड़ी के मज़दूर है
कुछ भी करा लो

दो वक्त की रोटी
हो जाता है
साहब …
दिहाड़ी से
क्या पुरेगी
और
क्या बचेगी ।।

देखतें है
छत कब बनेगी
दीवार का उठेगी
उठेगी तब उठेगी
पर मेरे यार
हौसला
अपना मत खोना
भीग लेना बारिशों में
जाड़ों कुछ अकड़ जाना

पर …देख लेना
धूप की ताप
भूख की तपन से
तुझे कम ही लगेगी
और जिस दिन
ईमान बिक गया
तब तुझे
धूप जलेगी ।।

आंकड़ा … 20 + 1

एक आंकड़ा
और जुड़ गया
और …
कुछ नहीं बदला
जिंदगी में
बस उम्र का
वर्ष का आंकड़ा
बदल गया
जिंदगी में ।।

आंकड़ा जो
जुड़ गया
हाँ , ये जिंदगी
कुछ घट गई
और …
वैसे ही चल रही
है जिंदगी में ।।

दौर ए वबा है
तन्हाई है
गालियाँ चौबारे
सब सुनी है
खौफ़ फैला है
हर मन
के … अंदर
ज़हर घुल गई है
जिंदगी में ।।

अब इस साल को
देखना है
क्या बनाता है
क्या बिगड़ता
है जिदंगी में ।।

यूँ तो पाना
कोशिश ए मेहनत से
ही लिखा है
जिंदगी में
पर कोई बताए
तक़दीर बिना
फ़क़त …
कोशिश ए मेहनत से
सब पा लिया है
जिंदगी में ।।

पर मैं तो मुसाफ़िर हूँ
कहाँ रुकना है
जिंदगी में
पाना खोना का
ग़म छोड़
सफ़र करना है
जिंदगी में ।।