खुश रहने के
बहाना ढूंढने लगा
के दिल को दर्द अब
प्यारा लगने लगा ।।
कई दफा मिले हम
नज़रें भी मिली
शोरशराबा अब
दिल को पसंद नहीं
दिल को टकरार पसंद नहीं
के जुबां अब
खामोश रहने लगा ।।

खरीदारी से
बहोत दूर रहता था
मिलना जुलना भी
कम करता था
लेन देन कि भी
आदत नहीं था
पर दिल अब
तोहफे खरीदने लगा ।।
नुक्कड़ की चाय फ़ीकी
और पान पसंद तो नहीं
फिर भी कई शाम
गुजरे है वहाँ
के जिंदगी का अब
जायका बदलने लगा ।।








