पीर पड़ी भक्तन पर, कहाँ हो भगवंता
भक्त विनय करें द्वारे, सुनी लो हनुमंता ।।
हे संकट मोचन धीर , रामदूत बलबीर
हे रामभक्त पवनसुत, काटों मोरी पीर ।।

पीर पड़ी भक्तन पर, कहाँ हो भगवंता
भक्त विनय करें द्वारे, सुनी लो हनुमंता ।।
हे संकट मोचन धीर , रामदूत बलबीर
हे रामभक्त पवनसुत, काटों मोरी पीर ।।

सोचते-सोचते
थम सा जाता हूँ
तन्हाई में गम हो जाता हूँ
मिट्टी के अलावा
कुछ नहीं है शरीर
फिर भी इसे खूब सजता हूँ ।।
जीना भी है यहीं
मरना भी है यहीं
न आने का पता
न जाने का पता
फिर भी कल के लिए कमाता हूँ ।।
कभी दर्द के लिए
कभी खुशी के लिए
पीते ही जाता हूँ
कभी प्यार के नाम पे
कभी अपनों से
बस ये धोखा खाता हूँ ।।

जीत-हार भूलकर
चलो चलें झूमकर
ये जिंदगी जो मिली हमें
बित न जाए यूँ ही
ग़म से हार हार कर कर ।।
चल चलो सफर करें
के जिंदगी रुक न जाए
कहीं कभी थक कर ।।
कभी दुश्मनों से मिला करो
कभी गले अपनों से लगा करो
प्यारी जिंदगी को प्यार से जिया करो
जिंदगी जियो यूँ ही सँवार कर ।।

2122 1212 22
ये यकीं है मुझे तू आएगा
दौर तेरा बदल जो जाएगा ।।
यूँ ख़िरद से तो कुछ न होएगा
माटी का माटी में तू जाएगा ।।
जिंदगानी ये चार दिन की सुख
दुख ही तो कमा तू पाएगा ।।

माँ का दिल दुखाने से पहले
यज्ञ तू ये बस जाने ले ।।
मेरी जरुरत को जान ले
मेरी चाहत को पहचान ले
इस जहान में सिर्फ वो तो
माँ है यज्ञ ये तू जान ले ।।
माँगे बिना ही जो देदे
वो दिल माँ का होता है
मेरे जख्मों का दर्द माँ के
चेहरों से नज़र आता है ।।
अपनी खुशियों को भूल
यज्ञ तुझे माँ हँसती है
हज़ारों काम हो पर तेरे
ज़रुरी काम याद दिलाती है ।।
हाँ माँ ऐसी होती है
खुद को कम और
अपने बच्चों को
ज्यादा जीती है ।।
बेवजह की कहानी क्यों सुनाया जाए
हाँ जो जरूरी हो वही बताया जाए ।।
बहोत दिनों से जल रही है आग यहाँ वहाँ
चलो अपने दिलों की आग बुझाया जाए ।।

यज्ञदत्त #यज्ञ
मेरे बातों पे तुझे यक़ीन नहीं न मुझे तेरे बातों पे
दिलों में अपने फिर से विश्वास जगाया जाए ।।
बेफिक्री की जिंदगी जी रहे
अपने स्वार्थ के आड़ में
कभी खुद मर रहे
कभी दुसरों को मार रहे
इस कोरोना के जाल में ।।
क्या बिगड़ जाएगा
जो पहन लें हम मास्क
पर हाँ जान लो न पहनें तो
बहुत कुछ बिगड़ जाएगा ।।

यज्ञदत्त #यज्ञ
सबको …
अपने दिल को पास रखो
और कुछ गज की दूरी रखो
मिलना जुलना अभी कम करो
व्हाट्सएप फेसबुक में हाय बाय रखो
नहीं तो जिंदगी का ही
बाय बाय हो जाएगा
आपका सारा नेटवर्क
डेटा क्रैश हो जाएगा
किसी का टॉपअप खत्म
किसी का नेटवर्क नहीं आयेगा
कोई स्विच ऑफ तो
कोई नेटवर्क से बाहर बतायेगा
किसीका स्टेटस नहीं मिलेगा
लास्ट सीन बहुत पुराना बतायेगा ।।
ये सब बिगाड़ से अच्छा
हम सब मास्क पहने
कुछ दिन दूर ही ठहरें
गले मिलेंगे फिर कभी
जब कोरोना का जाल
खत्म हो जाएगा ।।
क्या गलत क्या सही क्यों सोचता है
यज्ञ अपना और अपने परिवार का सोच
उन्हें सुरक्षित रखना है
तू बिन मास्क क्यों निकलता है
सबसे दूर दूर क्यों नहीं रहता है
जब साथ रहने को कहते थे
तो दूर दूर रहते थे
आज दूर दूर रहने को कहते है
तो पास पास रहते हो
तुम चाहते क्या हो यज्ञ
तुम दुश्मन किसके हो
तुम तो हर किसीके
दुश्मन हो
राष्ट्र का, समाज का,
खुद का और अपने ही परिवार का ।।

यज्ञदत #यज्ञ
थोड़ा थोड़ा जीने की बात नहीं करना
यार गिन कर पीने की बात नहीं करना ।।
दर्द ही तो है इस दर्द के साथ जी लेंगे हम
मग़र जख़्म सीने की बात नहीं करना ।।
उम्र गुज़रा है इस गली में और गुजरेंगे पर
इसे छोड़ कर जाने की बात नहीं करना ।।
क्या हुआ जो वो साथ नहीं है मेरे पर तुम
मुझसे उसे भुलाने की बात नहीं करना ।।

यज्ञदत #यज्ञ
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मैं रहूँ ना रहूँ मेरे अल्फ़ाज़ जाविदां हैं, कल मिलू ना मिलू यह अंदाज़ अलहदा है...
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