हमने कई रंग सजा रखें है

कण कण में है हरि सुमर प्रह्लाद ये बतला दिया
फाड़ कर स्तंभ नरसिंह रुप हरि ने बतला दिया ।।

हमने कई रंग सजा रखें हैं
उसने कई रंग लगा रखें हैं ।।

ये अपनी अपनी फ़ितरत हैं यारा …
हमने उदू को गले लगा रखें हैं
उन्होंने ने हमें उदू बना रखें हैं ।।

होली की ढ़ेरों शुभकामनाऐं यारों 🙏

होली है …

भंग में डूबा मेरा भोले बाबा
रंग में डूबे देखो कान्हा राधा
मेरा भोला नाचे भूतों के संग
कान्हा फिरे रे टोलियों के संग
देखो आई है फागुन की फुहार
संग ले के उमंग की बहार
मेरा भोला नंदी भृंगी प्रेतों के संग
राधे रानी फिरे गोपियों के संग
कान्हा पीछे भागे ले के पिचकार
ले के पिचकारियों की मार ।।
जोगी जी सा रा रा रा रा … रा …होली है….
….होली की हार्दिक शुभकामनाएं

दर तेरे …

अब जो होगा सो होगा हम है दर तेरे
गुज़ारिश इल्तिजा हर तमन्ना है दर तेरे ।।

तू पूरी कर न कर हैं मर्ज़ी तेरी
हम भी छोड़ने वाले है कहाँ दर तेरे ।।

हम भी दीवाने है तेरी ही जहान के
तू प्यार दे या दे नफ़रत है दर तेरे ।।

मुझसे ही रंगना तुम अबकी होली में
वरना बेरंग ही रहेंगे हम ताउम्र दर तेरे ।।

तेरा रंग …

यूँ तो रंग कई है जिसमें डूब जाऊँ
पर एक तेरा रंग है जो उतार न पाऊँ ।।

ऐसे कई खुमारी चढ़ी और उतर गई
पर क्यों तेरे गली को भूल न पाऊँ ।।

बेस्वाद सा हो जाता है यूँ जिंदगानी
जब तलक तेरी कसमें न खाऊँ ।।

यूँ तो और भी है काम यज्ञ जिंदगी में
दिल को भाये तेरी नौकरी बजाऊँ ।।

गुलाल… रंग… Colours…

विध्युत विस्फोटित हो रहे है तन में
प्रेम का अबीर मल लिया है मन में
तन केसरिया मन केसरिया
छा गया है केसरिया जीवन में ।1।

कर दूँ खंड खंड हर दुःसाहस को
कर प्रबल वेग धमनी शिराओं को
बिखेर के गुलाल धरती अंबर में
प्यास तृप्त कर जाऊँ धरा को ।2।

फाग की मल्हार में
विलन हो स्नेह और प्यार में
न ललकार युद्ध के द्वार में
भय से कांप उठोगे
प्रचण्ड बिजली दमक उठेंगी
जब नरक के द्वार में ।3।

समझ वेदना बिछोह का
अपने प्राणप्रिये प्रीतम का
हो चाहे एकत्र अनेक
एक बाण की पर्याप्त है अर्जुन का
न जगाओ क्रोध की ज्वाला
सर्वष्य नाश हो जायेगा
त्रिनेत्र खुल जाये जो महाकाल का ।4।

मर्दन दमन नाश कर दूँ
उठे है जो अभिमान में
प्रेम का आलिंगन स्वीकार कर
नहीं तो खंडित कर दूँ
भुज उठे है जो अंहकार में ।5।

है जो उन्मदित उन्माद जो
मेरे प्रेम का देखेगा प्रहार जो
रंग गुलाल बिखेर कर
खेलूँगा भक्ति की होली में
तुम जैसे होंगे अनगिनत
मुझ जैसे है आज भी
कुछ छोटी बड़ी टोली में ।6।

अबीर… गुलाल…

तनिक अभिमान जो भरा था
भस्म होगी वो होलिका
निखर दमका कुंदन भक्ति
फिर भक्ति गूंजी प्रहलाद का
क्षण भंगुर बलिष्ट अभिमान को
भक्षण हुआ नरसिंह का
शीश… 3 न उठा
कट गये है वो
एक एक कर
है प्रमाण दशानंद का
अबीर उड़े है अम्बर में
प्रेम भक्ति के स्वर में
नर नारी दिख रहे है
रंग रंग में
फागुन की फाग
डूब रहे है गीत मल्हार में ।।

🙏🙏 होली की हार्दिक शुभकामनाऐं आप सभी को 🙏🙏

Quote.… 8 …होली की गाथा

होली की गाथा लिख दूँ
भक्ति की
परिभाषा लिख दूँ
अग्नि जला न पाया
प्रहलाद को
वो शक्ति लिख दूँ
सत्य धर्म का
मार्ग दिखया
प्रहलाद का
प्रयास लिख दूँ
सिंहनाद नरसिंह का
भक्त का
विश्वास लिख दूँ
विनाश किये प्रभु
राक्षस का
वो रक्षा लिख दूँ
बसंत का
प्रीत लिख दूँ
फागुन का
फाग लिख दूँ
रंगों का
बौछार लिख दूँ ।।

Quote…. 7

रंग मारो भर भर कर, गुलाल लगाओ भर भर कर
ये बेरंग दुनिया को,रंगीन कर दो भर भर कर ।।