माँ चन्द्रघण्टा

ॐ एं ह्रीं क्लीं
महादेवी नमस्तुभ्यं
ॐ श्रीं शक्तयै नमः
चंद्रघंटा नमस्तुभ्यं ।।

माँ ऐसी होती है …

माँ का दिल दुखाने से पहले
यज्ञ तू ये बस जाने ले ।।

मेरी जरुरत को जान ले
मेरी चाहत को पहचान ले
इस जहान में सिर्फ वो तो
माँ है यज्ञ ये तू जान ले ।।

माँगे बिना ही जो देदे
वो दिल माँ का होता है
मेरे जख्मों का दर्द माँ के
चेहरों से नज़र आता है ।।

अपनी खुशियों को भूल
यज्ञ तुझे माँ हँसती है
हज़ारों काम हो पर तेरे
ज़रुरी काम याद दिलाती है ।।

हाँ माँ ऐसी होती है
खुद को कम और
अपने बच्चों को
ज्यादा जीती है ।।

मेरी माँ … My Mother

मेरी माँ
धर्म कर्म गुरु है
इस धरा में मेरे लिए
ईश्वर का स्वरूप है
संस्कृति संस्कार है
मेरे लिए
सही गलत का ज्ञान है
ममता की धारा
करुणा की सागर
मेरे गलती को
सुधारने वाली
धर्म कर्म के पथ पर
चलाने वाली गुरु है ।।

माँ… नज़र उतारा करती थी

छींक भी आ जाये… तो
माँ अपने सारे नुस्खे आजमा लेती थी
बहार से घर आओ… तो
नज़र उतारा करती थी
ऐसा प्यार कौन कर सकता है भला
ऐसा ख्याल कौन रखता है भला
माँ के बिना… जिंदगी अधूरा
घर से दूर माँ से दूर
अब मिलते है लोग… तो
सिर्फ नज़र लगाने को ।।

माँ है तो, मैं हूँ …३ (Maa… माँ… Mother)

Part … 2

कवि वाक्य बुने
शब्द शब्द जोड़कर…

चादर बुने बुनकर
ताग ताग जोड़कर…

नारी जीवन बुने
जैसे हो कोई बुनकर…

श्वास श्वास बुने
अपने रक्त मांस जोड़कर…

माँ तूने है बुने
माँ तूने है मुझे बुना… अपनी वेदना को पी कर ।।

माँ, तुम से, मैं हूँ
माँ है तो , मैं हूँ ।।