धीरे धीरे, अपनी मंज़िल को, पा रहा है … 👇
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अँधेरा

मैं खुद से दूर होने लगा
स्वार्थ मेरा बढ़ने लगा
सच का दीपक बुझ गया… शायद
अँधेरा अंतर मन में फैलने लगा ||
अँधेरा = झूठ
फासलें …

मुझे भूले तो नहीं हबीब मेरे
चंद दिनों की फासलें जो आई दरमियाँ ||
मतलब का जहान

दफन होते जिस्म रूह को कैद होते देखा है
मैं आज़ाद हूँ फिर क्यों इश्क़ से डर जातें है ||
#यज्ञ
वक़्त

जख़्म तूम देना मलहम वक़्त लगा देगा
देर से सही तुझे मुझे वक़्त भुला देगा ||
खुशियाँ … / Happiness …

बहोत निभाई है तुमने खुशियाँ
देखतें है क्या ग़म में साथ होते है तुम हम ।।
गुनगुना लूँ ज़रा

सुनायेंगे फिर कभी अपना हाल
आज तुम्हें कुछ सुन लूँ कुछ गुनगुना लूँ ज़रा ।।
दूरी

कौने दिल का हाल सुनाये हर दिल दर्द बसता है
तुम कहीं और मैं कहीं पल पल ये दूरी चुभता है ।।
ऐतबार

तसल्ली अपने पास रख इतना तो ऐतबार रख
मोहलत दे भूल जाने को मेरे वादे पे ऐतबार रख ।।
